हर अंत एक नई शुरुआत: करुणा के आईने में २०२५

साल का अंत अक्सर हमें बाहर की दुनिया में कहीं दूर ले जाने का वादा करता है — यात्राएँ, उत्सव, उपलब्धियाँ। इंस्टाग्राम का ज़माना माँग करता है कि कुछ हैपनिंग सा हो, कुछ कपड़े हों ख़ास, चमकीले रंग और शोर गुल का माहौल.. लेकिन इस बार मेरे साल के आख़िर के कुछ दिन बाहर नहीं, भीतर की ओर थे। वृंदावन की कम प्रचलित गलियों में, उन लोगों के साथ जिनकी हर साँस में करुणा का स्पर्श है, पशुओं को भोजन कराते हुए मैंने मुझ से मुलाकात की।

साल का अंत इस बार जैसे अंत ना होकर किसी शुरुआत का सूचक बनके आया.. वृंदावन में पशुओं को भोजन देना कोई "कार्य" नहीं लगता। वह एक संवाद है — बिना शब्दों के। ब्रज एनिमल केयर फीडिंग वॉक सुनने में रोचक जितना है उससे कहीं ज़्यादा... वे निर्वाक आँखें शिकायत नहीं करतीं, वे केवल स्वीकार करती हैं। जब एक गाय चुपचाप पास आती है, जब एक कुत्ता संकोच के साथ रोटी लेता है, तब अहंकार अपने आप गिरने लगता है। वहाँ कोई देने वाला बड़ा नहीं होता, न लेने वाला छोटा। जब प्रतिदिन सुबह ९ बजे उठकर हम जाने लगे, ठिठुरती ठंड में भी मोटिवेशन सा लगता। क्यों? क्योंकि पिछले २-३ दिनों में जो नई दोस्ती हुई है, उन दोस्तों की खुशी का एहसास उनकी प्यारी सी पूँछों के नृत्य और दौड़ के आने की तालों को सुनने व देखने के लिए मन अटका रहता था!

उस क्षण मुझे यह समझ आया कि मानव विकास केवल तकनीक या बु‌द्धि से नहीं होता, वह सहानुभूति से होता है। जब हम किसी कमज़ोर जीव की पीड़ा को महसूस कर पाते हैं, तभी हमारा वास्तविक विकास होता है। पशुओं को भोजन कराना मुझे यह सिखा गया कि करुणा कोई अतिरिक्त गुण नहीं, बल्कि मनुष्य होने की मूल शर्त है।

साल-भर की थकान, संघर्ष, अधूरे प्रश्न — सब जैसे उन शांत पलों में घुलने लगे। पशुओं की मौन उपस्थिति ने मुझे मेरी अपनी बेचैनियों से परिचित कराया। मैंने महसूस किया कि जितना मैं बाहर शांति ढूँढ़ रही थी, वह उतनी ही भीतर बिखरी हुई थी। क्योंकि संवेदनशील होना शायद २०२५ में कूल ना मालूम पड़े, लेकिन संवेदनशील होना आपके उन चार पैर वाले दोस्तों को कूल बनाता है और बल्कि उनके नज़रिये से पूछो तो आपसे कूल और कौन है जो ये समझता है कि ये ब्रज, ये रज सब उनका भी उतना ही है या यूँ कहें कि उनका हमसे कहीं ज़्यादा। सच कह रही हूँ आप कूलेस्ट हैं और जैसे-जैसे मैंने बिना अपेक्षा के देना सीखा, वैसे-वैसे भीतर की गाँठें खुलने लगीं।

ब्रज एनिमल केयर और उनकी टीम ने यह भी सिखाया कि सेवा कोई महान कार्य नहीं, बल्कि एक सहज अवस्था है। जब मन खाली होता है, तभी वह भरता है। जब हाथ किसी और के साथ के लिए उठते हैं, तभी आत्मा संतुष्ट होती है।

२०२५ साल के अंतिम दिनों में यह अनुभव एक दर्पण बन गया — जहाँ मैंने अपने आप को, अपने घाव और अपनी आशाओं को एक साथ देखा। शायद यही वर्ष का सबसे बड़ा उपहार था:- यह बोध कि अगर हम करुणा के साथ जीना सीख लें, तो हर अंत एक नई शुरुआत बन सकता है।

वृंदावन से लौटते समय मेरे पास कोई तस्वीर नहीं थी, कोई शोर नहीं था — बस एक शांत संकल्प थाः-

थोड़ा और मानवीय बनने का।

थोड़ा और संवेदनशील रहने का।

और हर नए वर्ष को भीतर से बेहतर करने का।